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श्री गजपंथ सिद्धक्षेत्र : श्रद्धा, साधना और सिद्धत्व की पावन भूमि

गजपंथ सिद्धक्षेत्र दिगम्बर जैन समाज का एक प्राचीन, पौराणिक एवं अत्यंत पूजनीय सिद्धक्षेत्र है। यह क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक महिमा, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण विशेष प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस अवसर्पिणी काल में यहाँ से सात बलभद्र एवं आठ करोड़ मुनिराजों ने मोक्ष प्राप्त किया, जिससे यह क्षेत्र जैन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

पहाड़ की तलहटी में स्थित श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ दिगम्बर जिनमंदिर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा अधर (भूमि से ऊपर) स्थित मानी जाती है। इसके साथ ही त्रिकाल चौबीसी मंदिर, भव्य समवशरण मंदिर तथा अनेक सुंदर जिनालय श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। यहाँ स्थित भारतीय जैन संस्कृति संग्रहालय एवं ‘आत्मविज्ञान’ संग्रहालय जैन दर्शन और प्राचीन मूर्तिकला का अद्भुत परिचय कराते हैं।

पर्वत पर स्थित प्राचीन गुफामंदिर, जिसे ‘चामर लेणी’ या ‘जैन लेणी’ कहा जाता है, अपनी कलात्मकता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान शांत, प्रदूषणमुक्त और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, जो स्वाध्याय, ध्यान और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।

तीर्थ क्षेत्र में यात्रियों के लिए धर्मशाला, भोजन, निवास, चाय-नाश्ता एवं पूजन-सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही यहाँ संचालित ‘श्री देशभूषण कुलभूषण छात्रावास (गुरुकुल)’ में विद्यार्थियों को धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा प्रदान की जाती है। यह सिद्धक्षेत्र आध्यात्मिक साधना, शांति और आत्मकल्याण का अद्भुत केंद्र है।