गजपंथ सिद्धक्षेत्र के शिल्पी
आद. बा.ब्र.पं.श्री धन्यकुमारजी बेलोकर
महाराष्ट्र प्रांत के बुलाडाणा जिले के एक छोटे से गांव, डासाला में धन्यकुमार नामक होनहार बालक का जन्म ६ मार्च १९३२ को हुआ। उनके पिताजी का नाम मोतीराम बाळाजी बेलोकर, माताजी का नाम चंद्रभागाबाई बेलाकर था। इनके ९ भाई और २ बहने थी।
पं. श्री धन्यकुमारजी बेलोकर ने आचार्य समन्तभद्र महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ई. सन् १९६० में कुंथलगिरी में लिया था।
ई. सन १९६६ से १९९१ तक लगभग २५ वर्षों तक श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ जैन मंदिर शिरपुर वाशिम महाराष्ट्र की सेवा की एवं शिरपुर में रहकर उन्हों ने अनेक कार्य किये जैसे पवली मंदिर का जिर्णोद्धार कराया, भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव कराया। जब शिरपूर में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को चक्षु आदि लगाकर श्वेतांबरों द्वारा उपसर्ग किया जा रहा था तब उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर भी प्रतिमा की रक्षा की। उन्होंने सन १९७० में श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ शिरपुर में गुरूदेव श्री के करकमलों द्वारा महाराष्ट्र प्रांत का प्रथम १००८ श्री पार्श्वनाथ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव कराया। पूज्य गुरुदेव, धन्यकुमारजी को महाराष्ट्र का केशरी एवं जैनों के शिवाजी कहते थे।

