संक्षिप्त परिचय गजपंथ सिद्धक्षेत्र
१) दिगम्बर जैनों का यह चतुर्थकालीन पवित्र, पूजनीय, प्राचीन, पौराणिक सिद्धक्षेत्र है।
२) आचार्य श्री कुन्दकुन्द देवने समयसार का मंगलाचरण “वंदितु सव्व सिद्धे…” (सब सिद्धों को नमस्कार) इस प्रकार किया। सिद्धक्षेत्र पर आकर भक्तलोग सिद्धों का स्मरण, मनन, चिंतन तथा ध्यान करते हैं।
३) पहाड की तलहटी में उंचे स्थान पर प्राचीन श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ दिगंबर जिनमंदिर है (यहां पार्श्वनाथ भगवान की मूर्ति जमिन से अधर है।) तथा त्रिकाल चौबीसी जिनमंदिर है। अन्य मनोहर मंदिरों का समूह है।
विस्मयकारी समवशरण मंदिर है। भारतीय जैन संस्कृति मंदिर संग्रहालय अंतर्गत प्रसिद्ध प्राचीन मूर्तियों का संग्रहालय तथा जैन दर्शन का हार्द खोलनेवाला ‘आत्मविज्ञान’ संग्रहालय है। यहां श्री देशभूषण कुलभूषण छात्रावास (गुरुकुल) जो इ. सन २०१९ से चल रहा है।
यहां दो धर्माशालाएं हैं। तीर्थवन्दना, स्वाध्याय के लिये आनेवाले यात्रियों के लिये इस निसर्गरम्य, रमणीय, प्रदुषणमुक्त, शांत वातावरण में तीर्थ वन्दना, पूजन, स्वाध्याय निवास, चाय / नास्ता, भोजन आदि सभी प्रकार की उत्तम सुविधायें उपलब्ध हैं। यहाँ आप आध्यात्मिक शिबिर तथा विधान पूजन आदि सामुहिक कार्यक्रम को आयोजित कर सकते है।
यहां ‘श्री देशभूषण कुलभूषण छात्रावास’ यह गुरुकुल चल रहा है जहाँ ८, ९ और १० वी के छात्र पढ रहे हैं।
४) पहाड पर कलापूर्ण प्राचीन गुफामंदिर है। नाशिक महानगरपालिका द्वारा नाशिक शहर के प्रेक्षणीय स्थलों में इसका नाम ‘चामर लेणी’ या ‘जैन लेणे’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह स्थान रमणीय, नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर, शुद्ध हवा, जलयुक्त, आरोग्यदायी, शांतिपूर्ण, स्वाध्याय, धर्मध्यान के लिये अनुकूल है।
५) इस पवित्र, पूजनीय, परमपूज्य, प्राचीन, पौराणिक गजपंथ सिद्धक्षेत्र से इस अवसर्पिणी के चौथे काल में नऊबलभद्रों में से सात बलभद्र तथा आठ करोंड मुनिराज मोक्ष गये है। इस कारण यह क्षेत्र महान, पवित्र व परम पूज्यनीय है।.


